सोचता हूँ
कुछ पल के लिए ही सही
चीजों को एक अलग नज़रिए से
देखने की कोशिश करूँ
सामने खड़े सूखे-बदसूरत पेड़ पर
झल्लाने के बजाय
उसकी पतली, हवा में लहराती
टहनी पर पूरब की ओर
मुंह करके बैठे मैना-युगल को
देखूं और, मुस्कुराने से
खुद को न रोकूँ
ऊँगली में चुभे कांटे को
कोसने के बजाय
उसके बिलकुल पास ही खिले हुए
पीले गुलाब को देखूं और
बगैर कोई आहट किये
उसे हौले से स्पर्श करूँ
कमरे के वास्तु से लेकर
टूटे फर्नीचर पर आँख
तरेरने के बजाय
पश्चिम की दीवार पर टंगी
उस पुरानी पेंटिंग को देखूं
जिसपर लिखा है-
'कोशिशें कामयाब ज़रूर होती हैं'
यादों के शहर में घूमते हुए
तानों-उलाहनों, विछोह और उदासी
के पन्नों को परे रखकर
उस पन्ने को खोलूं जिसमें-
हमारे प्रथम मिलन, संश्लिष्ट
तप्त सांसों और तेज धडकनों
का ब्यौरा दर्ज है
बोझिल -मनहूस शाम के
दर पर बैठकर उदास
होने के बजाय
आगामी सुबह की चमकती
हुई देहरी पर सफ़ेद उजाले में
खुद को तर-ओ-ताज़ा महसूस
करूँ
जल रहित और निरर्थक
गर्जन-तर्जन युक्त
कारे -कजरारे मेघों को देखकर
निराश होने के बजाय
इनकी अनियंत्रित और उद्दंड
भागादौड़ी से गगन में निर्मित
होने वाली उन अनेक अद्भुत और
मनोहारी चित्राकृतियों को देखकर
मन को उन्हीं के साथ घूमने के
लिए स्वतंत्र छोड़ दूँ
सोचता हूँ,
तनिक हंसूं , मुस्कुराऊँ, इतराऊँ
आज मैं भी
थोडा रूमानी हो जाऊं .......!!
wahh kya baat kahi apne ki "mai bhi thoda rumani ho jau"
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