मेरा जीवन
मेरा जीवन खुली किताब नहीं है
इसके कुछ पन्ने गायब हैं
कुछ स्वच्छ हैं
कुछ स्याह हैं
कहीं भाषा क्लिष्ट है
कहीं वर्तनी की अशुद्धि
कहीं व्याकरण-दोष
तो कहीं लिपि अबूझ
बहरहाल,
अभी भी कुछ पृष्ठ
कोरे बचे हुए हैं
जिनपर मैं
कुछ ऐसा लिखने की
कोशिश कर रहा हूँ
जो कम-से-कम
मेरे लिए तो बोधगम्य हो........!!
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