बड़े से बड़ा सुख भी
एक छोटे से दुख को
बेदखल नहीं कर सकता
दुख का वजूद
कायम रहता है
सुख के समानांतर
एक दुख को
दूसरा दुख ही
बेदखल करता है
परत दर परत
दुख की सतह
मोटी होती जाती है हम प्रायः सबसे
ऊपरी सतह से
जूझते रहते हैं
सुख तो तात्कालिक और
अस्थाई होता है
अतिशीघ्र वाष्पित
हो जाता है
जबकि दुख ठोस
और स्थायी होता है
घनीभूत होकर
जम जाता है
संवेदना की जमीन पर.
Wherever you go, go with all your heart. Everyday is a gift, that’s why they call it the present.
Wednesday, June 4, 2014
बड़े से बड़ा सुख भी
एक छोटे से दुख को
बेदखल नहीं कर सकता
दुख का वजूद
कायम रहता है
सुख के समानांतर
एक दुख को
दूसरा दुख ही
बेदखल करता है
परत दर परत
दुख की सतह
मोटी होती जाती है हम प्रायः सबसे
ऊपरी सतह से
जूझते रहते हैं
सुख तो तात्कालिक और
अस्थाई होता है
अतिशीघ्र वाष्पित
हो जाता है
जबकि दुख ठोस
और स्थायी होता है
घनीभूत होकर
जम जाता है
संवेदना की जमीन पर.
Tuesday, December 24, 2013
प्रयास
जो खो गया वो अतीत था
जो मिल रहा वो अज़ीज है Thursday, November 28, 2013
मुझे भी तितली बनना है
कितने रंग हैं तितली के परों पर
बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला
नारंगी और लाल
इन सारे इंद्रधनुषी रंगों का सम्मिलित
और समेकित प्रभाव
एक अलौकिक सम्मोहन एवं
आकर्षण उत्पन्न करता है
फलतः जीवन-यात्रा तनिक ज्यादा
प्रवाहपूर्ण, रसपूर्ण और उद्देश्यसिक्त
बन जाती है
लेकिन, इन रंगों में महज़
इंद्रधनुषी रंगों की छटा ही नहीं
गौर से देखने पर कतिपय
श्याम और धूसर रंग की परत भी
साफ़ दिखती है
लेकिन, तितली इनके भार से
दब जाने के बजाय
इन्हें इंद्रधनुषी रंगों के वलय में ही
समेकित कर लेती है
और, इस एकीकृत पहचान के साथ
नवीन ऊर्जा और उत्साह का
संचार करती रहती है
इस फूल से उस फूल
मुझे भी तितली बनना है
अपने दुखों, अभावों, कुंठाओं
और नैराश्य-सिक्त धूसर रंग को
अपनी ऊर्जा, उदात्तता, प्रेम
और अपनेपन के इंद्रधनुषी रंग में
मिलाकर एक समेकित और
संश्लेषित छवि बनाना है
और उड़ते जाना है
बस..... उड़ते जाना!
मेरे जज़बात
हरी घास पर जमी
जमकर बिखर गए हों
ओस की शक्ल में !
नन्हीं-२ ओस की बूंदें
मानो मेरे जज़बात ही
शुक्रिया!
शुक्रिया!
मुझे चलना सिखाने के लिए तुम ज़मीं हो मेरी
तुम ज़मीं हो मेरी
मेरी उम्मीदें आसमां के आर-पार
तैरती हैं
मगर, इनको पूरा करने का हौसला
और इस हौसले की जड़
तुममे ही है
मुझे उड़ने से मत रोकना
मगर, जब उड़ान के बाद
वापस लौटूं तो मुझे
मेरी ज़मीं से वंचित न करना
थाम लेना , अपना लेना मुझे
फिर से !!
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