तुम ज़मीं हो मेरी
तुम ज़मीं हो मेरी
मेरी उम्मीदें आसमां के आर-पार
तैरती हैं
मगर, इनको पूरा करने का हौसला
और इस हौसले की जड़
तुममे ही है
मुझे उड़ने से मत रोकना
मगर, जब उड़ान के बाद
वापस लौटूं तो मुझे
मेरी ज़मीं से वंचित न करना
थाम लेना , अपना लेना मुझे
फिर से !!
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