Friday, August 24, 2012

गणित 
मैं हमेशा गणित का एक 
औसत विद्यार्थी रहा हूँ 
जो साधारण गुणा-भाग 
जोड़ और घटाने  से ज्यादा 
कभी आगे नहीं बढ़ सका 
लेकिन...... 
तुम्हारा व्यक्तित्व मेरे समक्ष
गणित की एक बहुत ही क्लिष्ट  
पहेली की तरह उपस्थित हुआ 
जिसे हल करने की कोशिश 
तो मैं रोज़ करता हूँ 
लेकिन सफल नहीं हो पाता 
हालांकि.............
मैं सफल हो भी सकता हूँ 
 अगर तुम इस पहेली को 
हल करने में 
मेरी तनिक मदद करो 
 क्योंकि , मैं जानता हूँ 
तुम, गणित में 
मेरी तरह 'कमज़ोर' नहीं हो...!!

Tuesday, August 21, 2012

बारिश 
कितनी अजीब है 
ये बारिश भी 
शहर-गाँव 
खेत-खलिहान 
गलियां-सड़कें 
सबको भिगो दिया 
सर से पांव तक 
सराबोर होने के बावज़ूद 
मन का हरएक कोना 
तरस रहा है.......
काश! एक बूंद उसे भी 
मिल जाती तो 
बरसों की जमी हुई धूल 
कुछ तो साफ़ होती 
शायद कोई नया 
अंकुर पनपता .......!!

मेरा जीवन 
मेरा जीवन खुली किताब नहीं है 
इसके कुछ पन्ने गायब हैं 
कुछ स्वच्छ हैं 
कुछ स्याह हैं 
कहीं भाषा क्लिष्ट है 
कहीं वर्तनी की अशुद्धि 
कहीं व्याकरण-दोष 
तो कहीं लिपि अबूझ 
बहरहाल,
अभी भी कुछ पृष्ठ 
कोरे बचे हुए हैं 
जिनपर मैं 
कुछ ऐसा लिखने की 
कोशिश कर रहा हूँ 
जो कम-से-कम 
मेरे लिए तो बोधगम्य हो........!!

Monday, August 20, 2012

काश 
ज़माने की बुतपरस्ती 
देखकर 
दिल करता है 
काश! हम भी 
पत्थर ही होते.........!!
अन्तर्विरोधों का सामंजस्य 
वो खुश नहीं है 
पर मुस्कुराता है 
दिल में वीरानी है मगर 
महफ़िल में गाता है 
उसके लिए 
'अन्तर्विरोधों का सामंजस्य'
ही जीवन है .....................!!
आकाश-कुसुम 
वो शहर 
शहर  की वो गली 
नुक्कड़ पर वो मंदिर 
और गली के आखिरी छोर पर 
वो मकान 
सब वहीं हैं 
बस......
वो एहसास 
वो विश्वास 
वो  लड़ाइयां 
वो तकरार 
वो भोली सी मनुहार 
वो हंसी 
वो मुस्कुराहट 
वो मासूम खिलखिलाहट 
वहां होकर भी 
मेरे  'आकाश-कुसुम '
बन गयी है.................!!
घर 
यूँ  उसे भी अच्छा लगता है 
घर जाना-बोलना- बतियाना
लेकिन.....
ईंट-पत्थरों की दीवारों पर 
लदी छत  को ही तो 
घर नहीं कहते.............!!!