Monday, August 22, 2022

रिश्तों की बुनाई

मैंने कोशिश की
कि कोई धागा उलझ गया
या तनाव तनिक ज्यादा पड़ा
तो टूट ही गया तो
बजाय इसके कि
उस धागे को निकाल कर 
परे रख दूं और दूसरे
नए धागे से बुनाई
शुरू कर दूं
मैंने उस उलझे-टूटे धागे को
पूरी शिद्दत से सुलझाया
गांठ पड़ गई तो क्या,
जोड़ा और उसी से बुनाई की
सच है कि मेरे रिश्ते की चादर
एकदम से चिकनी, सपाट,
चमकीली नहीं है 
उसमें उलझनें हैं, टूटकर
जुड़ने की गांठें हैं
द्वंद्व की सिलवटें हैं
मगर, इसमें समाहित हैं
मेरे सफ़र की हर छोटी–बड़ी 
यादें, किस्से–कहानियां
एक निरंतरता है
मेरे अस्तित्व का जीवंत
दस्तावेज़ है मेरी बुनी हुई
रिश्ते की अनगढ़ चादर।
 

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