Monday, July 24, 2017

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Friday, July 7, 2017

भूल

ये भूल थी मेरी
सीमित करना चाहता था
तुम्हें
नियंत्रित करना चाहता था
तुम्हारी स्वच्छंद उड़ान को
एक परिभाषा में
क़ैद करना चाहता था
तुम्हारे क़िरदार को
लपेटना चाहता था तुम्हें
परंपराओं की मोटी चादर में
बांधना चाहता था
तुम्हारी खुशबुओं को
ढालना चाहता था तुम्हें
एक सांचे में
मगर,
ऐसा हुआ है कभी?
बांध सका है
कोई हवा को?
क़ैद कर सका है
कोई गुलों की खुशबू?
तुम अप्रतिम हो,
शाश्वत हो, शुद्ध हो
तुम्हारा क़िरदार
किसी परिभाषा में नहीं
बांधा जा सकता
अपनी सोच के दायरे में
तुम्हें सीमित करने की
कोशिश ही
मेरी सबसे बड़ी भूल थी
आज इस भूल का
परिष्कार करता हूँ
तुम जैसी हो
तुम्हें वैसी ही
स्वीकार करता हूँ।

Thursday, July 6, 2017

I May Not Be That Wise

You just can't judge
Dreams by their size
Your aura and
Scintillating charm
Is flowing
Through my eyes
Oh my angel!
I'm drowning in
The ocean of your
Adorable love for
I may not be
That wise.

Wednesday, February 15, 2017

यादों का सरमाया

बात पूरी भी न की उठ के चल दिए,
तुम मौसम तो न थे फिर भी बदल गए।
गुलों में रंग-ओ-बू सब तुम्हीं से थी,
गए तुम तो सब हवा के संग गए।
मंज़िल तुम्हारा दर था रस्ते तुम्हारी गलियां,
हम जाते तो कहाँ जाते रहगुज़र के हो लिये।
यादों का सरमाया ही अब पास है मेरे,
फिरता हूँ हर क़दम दिल में सफर लिए।