Wednesday, February 15, 2017

यादों का सरमाया

बात पूरी भी न की उठ के चल दिए,
तुम मौसम तो न थे फिर भी बदल गए।
गुलों में रंग-ओ-बू सब तुम्हीं से थी,
गए तुम तो सब हवा के संग गए।
मंज़िल तुम्हारा दर था रस्ते तुम्हारी गलियां,
हम जाते तो कहाँ जाते रहगुज़र के हो लिये।
यादों का सरमाया ही अब पास है मेरे,
फिरता हूँ हर क़दम दिल में सफर लिए।

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