Thursday, November 28, 2013

मुझे भी तितली बनना है

कितने रंग हैं तितली के  परों पर
बैंगनी, नीला, आसमानी,  हरा, पीला
नारंगी और लाल
इन सारे इंद्रधनुषी रंगों का सम्मिलित
और समेकित प्रभाव
एक अलौकिक सम्मोहन एवं
आकर्षण उत्पन्न करता है
फलतः जीवन-यात्रा तनिक ज्यादा
प्रवाहपूर्ण, रसपूर्ण और उद्देश्यसिक्त
बन जाती है
लेकिन, इन रंगों में महज़
इंद्रधनुषी रंगों की  छटा ही नहीं
गौर से देखने पर कतिपय
श्याम और धूसर रंग की  परत भी
साफ़ दिखती है
लेकिन, तितली इनके भार से
दब जाने के बजाय
इन्हें इंद्रधनुषी रंगों के वलय में ही
समेकित कर लेती है
और, इस एकीकृत पहचान के साथ
नवीन ऊर्जा और उत्साह का
संचार करती रहती है
इस फूल से उस फूल
मुझे भी तितली बनना है
अपने दुखों, अभावों, कुंठाओं
और नैराश्य-सिक्त धूसर रंग को
अपनी ऊर्जा, उदात्तता, प्रेम
और अपनेपन के इंद्रधनुषी रंग में
मिलाकर एक समेकित और
संश्लेषित छवि बनाना है
और उड़ते जाना है
बस..... उड़ते जाना!

मेरे जज़बात

हरी घास पर जमी 
नन्हीं-२ ओस की बूंदें 
मानो मेरे जज़बात ही 
जमकर बिखर गए हों 
ओस की शक्ल में !

शुक्रिया!

शुक्रिया!
मुझे चलना सिखाने के लिए
उड़ना सिखाने के लिए
गिरकर, संभलना सिखाने के लिए
अब मुक्त कर दो  मुझे
चलने दो अनदेखी-अनजानी राहों पर
उड़ने दो मुक्त गगन में
बहने दो निर्झर की तरह
गले लगाने दो समंदर को
तय करने दो तमाम फासले
आखिर,ये मेरे हौसले की ही नहीं
तुम्हारी सीख की भी कसौटी है !

तुम ज़मीं हो मेरी

तुम ज़मीं हो मेरी

मेरी उम्मीदें आसमां के आर-पार

तैरती हैं

मगर, इनको पूरा करने का हौसला

और इस हौसले की जड़

तुममे ही है

मुझे उड़ने से मत रोकना

मगर, जब उड़ान के बाद

वापस लौटूं तो मुझे

मेरी ज़मीं से वंचित न करना

थाम लेना , अपना लेना मुझे

फिर से !!