Wherever you go, go with all your heart. Everyday is a gift, that’s why they call it the present.
Monday, April 22, 2013
Saturday, April 6, 2013
तपते दिन हैं लम्बी रातें
तपते दिन हैं लम्बी रातें
साहिल से मझधार की बातें
आखिर वक़्त बहा ले जाता
हम बालू के महल बनाते
हर कोई शायर था जहां
ऐसे में हम क्या सुनाते
साक़ी ने जब फेर लीं नज़रें
मयखाने में हम क्या जाते
लाख रहे वो दूर मगर
खयालों में हैं आते-जाते
जी लेते इक उम्र तभी हम
शरमा के वो नज़र झुकाते।।
साहिल से मझधार की बातें
आखिर वक़्त बहा ले जाता
हम बालू के महल बनाते
हर कोई शायर था जहां
ऐसे में हम क्या सुनाते
साक़ी ने जब फेर लीं नज़रें
मयखाने में हम क्या जाते
लाख रहे वो दूर मगर
खयालों में हैं आते-जाते
जी लेते इक उम्र तभी हम
शरमा के वो नज़र झुकाते।।
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