जब हम मिले थे पहली बार
यहाँ पलाश का एक जंगल हुआ करता था
उससे होकर एक नदी बहती थी
सर्दियों के मौसम में सुदूर साइबेरिया से
पक्षियों के समूह प्रवास करने आते थे
इस मनोरम आर्द्र भूमि में
इनके बीच हमारा संबंध पुष्पित-पल्लवित
होता गया
बरस-दर-बरस टेसू के फूलों और
साइबेरियाई प्रवासियों ने
हमारे बीच ऊर्जा और उत्साह का संचार किया
मैं ख़ुद को सौभाग्यशाली समझता था
तुम्हारे साहचर्य, पलाश के जंगल
जंगल से गुजरती नदी और
साइबेरियाई प्रवासियों के बीच
फिर एक दिन अचानक
तुमने जाने का निर्णय ले लिया
मुझे छोड़कर, इन सब को छोड़कर
मैंने तुम्हारे जाने की वज़ह नहीं पूछी
हालाँकि, मैं जानना चाहता था
तुम्हारे जाने के बरस मैंने अनुभव किया
पलाश के पेड़ों पर कुछ कम फूल आये थे
नदी का प्रवाह भी तनिक मंद हो गया था
साइबेरियाई प्रवासी कुछ अनमने-उद्विग्न से थे
मैं वहीं ठहर गया था और देखा किया
बरस-दर-बरस पलाश के फूलों का कम होते जाना
नदी के प्रवाह और साइबेरियाई प्रवासियों
की संख्या का निरंतर और क्रमिक
रूप से न्यून होते जाना
तुम्हें गए कई बरस हो गए हैं
अब यहाँ जंगल में
नदी भी सूख गई है
हालाँकि उसके निशान अब भी बाकी हैं
साइबेरियाई प्रवासी भी अब नहीं आते
आज के अख़बार में एक ख़बर छपी है
"वैश्विक तापन के कारण इस क्षेत्र में
बहने वाली एक नदी सूख गयी,
पलाश के जंगल नष्ट हो गए
और साइबेरियाई पक्षियों ने आना बंद कर दिया है।"
पूरी दुनिया इस अख़बारी ख़बर से
सहमत है, सिवाय मेरे।
आज भी मुझे लगता है
जिस दिन तुम वापस आ जाओगी
ये पलाश का जंगल फिर से हरा हो जाएगा
नदी फिर से प्रवाहित होने लगेगी
फिर से आने लगेंगे साइबेरियाई प्रवासी
मेरे लिए न सही
एक बार तुम्हे वापस आना चाहिए
इन सब के लिए।
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