Wednesday, January 16, 2013

ऐसा नहीं

ऐसा नहीं मै किसी  की नज़र में नहीं
जो मेरी नज़र में है बस उसी की नज़र में नहीं 
आईने भी झूठ बोल सकते  हैं 
नुक्स हमेशा मेरी नज़र में नहीं 
आओ तलाशें मंजिल को यहीं 
अब कुछ भी रखा इस सफ़र में नहीं 
शब खामोश और तारीक थी इतनी 
गुम है, दिखता आफताब इस सहर में नहीं 
पतझर में ये तो होना ही था 
शिकवा फ़िज़ूल जो कोई पत्ता शज़र में नहीं।

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