ऐसा नहीं मै किसी की नज़र में नहीं
जो मेरी नज़र में है बस उसी की नज़र में नहीं
आईने भी झूठ बोल सकते हैं
नुक्स हमेशा मेरी नज़र में नहीं
आओ तलाशें मंजिल को यहीं
अब कुछ भी रखा इस सफ़र में नहीं
शब खामोश और तारीक थी इतनी
गुम है, दिखता आफताब इस सहर में नहीं
पतझर में ये तो होना ही था
शिकवा फ़िज़ूल जो कोई पत्ता शज़र में नहीं।
जो मेरी नज़र में है बस उसी की नज़र में नहीं
आईने भी झूठ बोल सकते हैं
नुक्स हमेशा मेरी नज़र में नहीं
आओ तलाशें मंजिल को यहीं
अब कुछ भी रखा इस सफ़र में नहीं
शब खामोश और तारीक थी इतनी
गुम है, दिखता आफताब इस सहर में नहीं
पतझर में ये तो होना ही था
शिकवा फ़िज़ूल जो कोई पत्ता शज़र में नहीं।
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