बड़े से बड़ा सुख भी
एक छोटे से दुख को
बेदखल नहीं कर सकता
दुख का वजूद
कायम रहता है
सुख के समानांतर
एक दुख को
दूसरा दुख ही
बेदखल करता है
परत दर परत
दुख की सतह
मोटी होती जाती है हम प्रायः सबसे
ऊपरी सतह से
जूझते रहते हैं
सुख तो तात्कालिक और
अस्थाई होता है
अतिशीघ्र वाष्पित
हो जाता है
जबकि दुख ठोस
और स्थायी होता है
घनीभूत होकर
जम जाता है
संवेदना की जमीन पर.
Wherever you go, go with all your heart. Everyday is a gift, that’s why they call it the present.
Wednesday, June 4, 2014
बड़े से बड़ा सुख भी
एक छोटे से दुख को
बेदखल नहीं कर सकता
दुख का वजूद
कायम रहता है
सुख के समानांतर
एक दुख को
दूसरा दुख ही
बेदखल करता है
परत दर परत
दुख की सतह
मोटी होती जाती है हम प्रायः सबसे
ऊपरी सतह से
जूझते रहते हैं
सुख तो तात्कालिक और
अस्थाई होता है
अतिशीघ्र वाष्पित
हो जाता है
जबकि दुख ठोस
और स्थायी होता है
घनीभूत होकर
जम जाता है
संवेदना की जमीन पर.
बड़े से बड़ा सुख भी
एक छोटे से दुख को
बेदखल नहीं कर सकता
दुख का वजूद
कायम रहता है
सुख के समानांतर
एक दुख को
दूसरा दुख ही
बेदखल करता है
परत दर परत
दुख की सतह
मोटी होती जाती है हम प्रायः सबसे
ऊपरी सतह से
जूझते रहते हैं
सुख तो तात्कालिक और
अस्थाई होता है
अतिशीघ्र वाष्पित
हो जाता है
जबकि दुख ठोस
और स्थायी होता है
घनीभूत होकर
जम जाता है
संवेदना की जमीन पर.
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